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जानिए चंडीगढ स्थित चंडी देवी के मंदिर के बारे में जानकारी

चंडीगढ़ भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है, जो दो भारतीय राज्यों, पंजाब और हरियाणा की राजधानी भी है इसका नाम का अर्थ है चंडी का किला यह हिन्दू देवी दुर्गा का एक रूप चंडिका या चंडी के एक मंदिर के कारण पड़ा है। यह मंदिर आज भी शहर में स्थित है। इस सिटी को ब्यूटीफुल भी कहा जाता है। आज हम आपको चंडीगढ़ स्थित चंड़ी देवी के मंदिर के बारे में बतायेंगें

चंडी मंदिर

माँ चंडी देवी को समर्पित चंडी मंदिर के नाम पर ही चंडीगढ़ का नाम पड़ा है। चंडीगढ़ से 15 किमी दूर चंडीगढ़-कालका रोड पर स्थित ‘चंडी देवी मंदिर’ स्थानीय लोगों के साथ–साथ दुनिया भर के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र है। यूँ तो प्रत्येक उत्सव तथा त्यौहार में देश भर से श्रद्धालुजन माँ के दर्शन के लिए यहाँ आते हैं, पर नवरात्र के दिनों में चंडी देवी के दर्शनों के लिए यहाँ भक्तों का रेला उमड़ पड़ता है।

कब जाऐं चंडी मंदिर

मार्च और अक्टूबर में नवरात्रि मेले की रौनक देखते ही बनती है। नवरात्रि के अवसर पर यहाँ भजन-कीर्तन तथा भंडारे का आयोजन भी होता है। दूर-दूर से पधारने वाले श्रद्धालुजन चंडी मन्दिर के आसपास के शहरों – पंचकूला, पिंजौर और ज़िरकपुर इत्यादि में भी ठहर सकते हैं।

चंडी मंदिर में मौजूद देवी देवता

मन्दिर में शक्ति की देवी चंडी की प्रतिमा के साथ-साथ राधा-कृष्ण, भगवान् शिव, भगवान् राम और भगवान् हनुमान की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। शाम साढ़े छह से सात बजे तक मन्दिर में आरती का आयोजन होता है। मान्यता है कि माँ चंडी की पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है।

चण्डी देवी को काली देवी के समान ही पूजा जाता है। माँ कभी-कभी दयालु रूप में उमा, गौरी, पार्वती, जगन्माता, भवानी कहलाती हैं और प्राय: उग्र रूप में दुर्गा, काली, श्यामा, चण्डी अथवा चण्डिका, भैरवी आदि के नाम से जानी जाती हैं। आश्विन और चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवरात्रि में चण्डी पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है।

चंडी देवी की संरचना

चंडी देवी असुरों का संहार करने वाली देवी हैं. देवताओं, ऋषि-मुनियों और मानव जाति को नुकसान पहुंचाने वाले असुरों का संहार करने के उद्देश्य से मां वैष्णों ने चंडी का रूप धारण किया और शुम्भ और निशुम्भ नामक असुरों का नाश करके समस्त विश्व का उद्धार किया.

अष्टकोण वाले देवी मां के मंदिर का शिखर वर्गाकार उठा हुआ है. प्रथम तल पर मंदिर के गर्भ गृह के दर्शन होते हैं. छतों व दीवारों पर पौराणिक भित्ति चित्र मंदिर की पौराणिकता का आभास दिलाते हैं, वहीं सिंदूरी रंग में रंगी मंदिर की इमारत में प्रवेश करते ही भक्तजन भक्तिरस में डूब जाते हैं.

कैसे पहुंचे चंड़ीगढ

वायु मार्ग

चंडीगढ़ एयरपोर्ट सिटी सेंटर से करीब 11 किलोमीटर की दूरी पर, दिल्ली मार्ग पर है। देश के प्रमुख शहरों से यहाँ के लिए नियमित उड़ानें हैं।

रेल मार्ग

चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन सिटी सेंटर से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है। यह रेलवे स्टेशन शहर को देश के अन्य हिस्सों से रेलमार्ग द्वारा जोड़ता है। दिल्ली से यहाँ के लिए प्रतिदिन ट्रेने हैं।

सड़क मार्ग

राष्ट्रीय राजमार्ग 21 और 22 चंडीगढ़ को देश के अन्य हिस्सों से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ते हैं। दिल्ली, जयपुर, ग्वालियर, जम्मू, शिमला, कुल्लू, कसौली, मनाली, अमृतसर, जालंधर, लुधियाना, हरिद्वार, देहरादून आदि शहरों से यहाँ के लिए नियमित बस सेवाएं हैं।

चंडी मंदिर पता, एंट्री फी, टाइमिंग

पता : चंडीगढ कालका रोड़, चंड़ीगढ, हरियाणा

एंट्री फी : कोई एंट्री फी नहीं है

टाइमिंग : सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है

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