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जानिए विश्वभर में प्रसिद्ध सूरजकुंड मेले की खासियत, क्यों कहा जाता इसे पारंपरिक धरोहर

पंरपरा, विरासत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के मिलेजुले रुप का खूबसूरत प्रमाण है सूरजकुंड मेला। जी हां, हरियाणा सरकार द्वारा हर साल फरवरी माह से शुरु होने वाले सूरजकुंड मेला एक अद्भुत हस्तशिल्प मेला है। जहां देश भर से तमाम लोग आते है। यह ऐतिहासिक मेला ख़ासतौर से अपनी शिल्पकला और हस्तकला के लिए प्रख्यात है। इतना ही नहीं यहां आपको विदेशी रंगमंच कार्यक्रम भी खूब देखने को मिलेंगे।

सूरजकुंड मेला हर साल फरवरी महीने में शुरु होता है और करीब 15 दिन तक चलता है।  यह मेला देश की कला एवं संस्कृति का एक सबूत है जिसमें देश विदेश के कलाकार, शिल्पकार आदि शामिल होते हैं। तो चलिए एक सैर आपकी भी करा देते है इस खूबसूरत मेले की जहां आपको एक ही जगह पर स्वादिष्ट खाने से लेकर, कपड़े, स्लीपर, फर्नीचर और झुले तक मिलेंगे।

सूरजकुंड मेले का इतिहास

सूरजकुंड मेले का थीम डांस

सूरजकुंड मेले का थीम डांस

सूरजकुंड शिल्प मेले का आयोजन पहली बार साल 1987 में भारत के हस्तशिल्प, हथकरघा और सांस्कृतिक विरासत की समृद्धि एवं विविधता को प्रदर्शित करने के लिए किया गया था। सूरजकुंड का नाम 10वीं सदी में तोमर वंश के राजा सूरज पाल द्वारा बनवाए गए एक प्राचीन रंगभूमि सूर्यकुंड से पड़ा था।

यह एक अनुठा स्मारक है क्योंकि इसका निर्माण सूर्य देवता की आराधना करने के लिए किया गया था। यह यूनानी रंगभूमि से मेल खाता है।यह मेला एक शानदार स्मारक की पृष्ठभूमि में आयोजित भारत की सांस्कृतिक धरोहर की भव्यता और विविधता का जीता जागता उदाहरण है।

सूरजकुंड मेला जिसे कहा जाता पारंपरिक धरोहर

सूरजकुंड मेला जिसे अगर हम और आप पारंपरिक धऱोहर कहे तो शायद गलत नहीं होगा। दरअसल इस मेले को स्थापित करने का उद्देश्य भी भारत के परपंपरागत रीति- रिवाजों को कायम रखना है। जिससे भारत की नवयुवा पीढ़ी में सांस्कृतिक समझ को बढ़ाने में सहायक मिले। यहां स्थित दोनों चौपालों पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम हर शाम नाट्यशाला की प्रस्तुतियां हमारी संस्कृति की मधुरता को प्रदर्शित करती है।

अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन कैलेंडर मिली पहचान

सूरजकुंड मेले का भव्य दृश्य

सूरजकुंड मेले का भव्य दृश्य

केंद्रीय पर्यटन, कपड़ा, संस्कृति, विदेश मंत्रालयों और हरियाणा सरकार के सहयोग से सूरजकुंड मेला प्राधिकरण और हरियाणा पर्यटन द्वारा संयुक्त रुप से आयोजित कार्यक्रम अपने सौंदर्य, भारत शिल्प, संस्कृति और व्यंजनों को प्रदर्शित करने के लिहाज से अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण स्थान और शोहरत लिए है।

बड़े बड़े देश होते सूरजकुंड मेले में शामिल

सूरजकुंड मेले में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार

सूरजकुंड मेले में अंतर्राष्ट्रीय कलाकार

साल 2013 में सूरजकुंड शिल्प मेले को अंतर्राष्ट्रीय मेले का दर्जा मिल जाने की वज़ह से यहां अब अलग अलग देशों से पर्यटक यहां अपने मनोरंजन के लिए आते है। साल 2015 में यूरोप, अफ्रीका, दक्षिण एशिया के 20 देशों ने इस मेले में हिस्सा लिया था। इस मेले में 23 देशों ने भाग लिया था।

जिनमें चीन, जापान, श्रीलंका, नेपाल, अफगानिस्तान, लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो, मिश्र, थाईलैंड, मालदीव, रुस, किर्गिस्तान, वियतनाम, लेबनान, ट्यूनिशिया, तुर्कमेनिस्तान, मलेशिया और बांग्लादेश की जोरदार उपस्थित थे। यह मेला 40 एकड़ क्षेत्र में लगाया जाता है।

फूड कोर्ट से लेकर शिल्पकारों को दिया जाता स्थान

सूरजकुंड मेले का फूड कोर्ट

सूरजकुंड मेले का फूड कोर्ट

सूरजकुंड मेले को थीम बेस बनाया जाता है  जिसमें शिल्पकारों के लिए अलग स्थान, फूड कोर्ट के लिए अलग स्थान और डांसिग कलाकारों को अलग स्थान दिया जाता है। यहां भारत के विभिन्न राज्यों के फूट स्टोल लगाए जाते है। जो यहां आने वाले लोगों का मन मोह लेते है।

इसके अलावा यहां जम्मू एवं कश्मीर का जबरो एवं रोउफ, छत्तीसगढ़ का पंथी, कर्नाटक का ढोलू कुनीठा, उड़ीसा का गोटी पुआ, असम का बिहू, हिमाचल प्रदेश का सिरमौरी, राजस्थान का कालबेलिया और चकरी, उत्तराखंड का छापेली, उत्तरप्रदेश का छाऊ, पंजाब का गिद्दा और भांगड़ा जैसे मशहूर डांस लोगों का मनोरंजन करने का काम करते है।

क्यों जाएं सूरजकुंड मेला

सूरजकुंड बाइस्कोप

सूरजकुंड बाइस्कोप

अगर आप एक ही स्थान पर देश भर की विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेना चाहते है तो हरियाणा सरकार की ओर से लगने वाला हर साल सूरजकुंड मेला आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है। यहां पर आप भारत की विभिन्न राज्यों की खूबसूरत कलाकृति का लुत्भ उठा सकते है।

बता दें देश भर के कारीगर इस मेले में अपनी हस्तकलाओं की वस्तुएं लेकर आते हैं। यहां लोक कलाओं के कलाकार अपने नृत्य,नाटकों से आपके लिए एक नया मंच तैयार करते है। यहां ख़ास व्यंजनों का आकर्षण आपका मन मोह लेगा। यह मेला भारत के ऐतिहासिक मेलो में से एक है। देखा जाए तो यह मेला हमें हमारी पारंपरिक गतिविधियों से हमें जोड़े रखने में कामियाब है।

मेले से जुड़ी जरुरी जानकारी

सूरजकुंड क्राफ्ट मेला

सूरजकुंड क्राफ्ट मेला

मेले में दर्शंको विकलांगो, भूतपूर्व सैनिकों, कार्यरत सैनिकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए टिकट में 50 प्रतिशत की छूट दी जाती है। स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रवेश शुल्क निशुल्क होता है। शनिवार रविवार और राजपत्रित अवकाश अवकाश के दिनों को छोड़कर मेले में स्कूल के बच्चे यदि स्कूल के माध्यम से स्कूल यूनिफार्म में आते हैं। उनका प्रवेश निशुल्क रहता है। टिकटें ऑनलाइन और ऑफलाइन ई टिकटिंग के जरिए भी उपलब्ध होती है।

सूरजकुंड मेला- पता, समय, एंट्री

पता- लेकवूड सिटी, सूरजकुंड, फरीदाबाद, हरियाणा- 121009

एंट्री- 100 से 150 रुपए(हर साल के आधार पर किया जाता थोड़ा बदलाव)

खुलने का दिन- 1 फरवरी से लेकर 15 फरवरी तक

नज़दीकी मेट्रो स्टेशन- बदरपुर मेट्रो स्टेशन

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